सर्कस के हाथी की कहानी

बहुत पुरानी बात है।

एक बहुत ही बड़ा सर्कस हुआ करता था।

इस सर्कस में बहुत से जानवर कई प्रकार के करतब किया करते थे।

इसी सर्कस में एक हाथियों का झुंड भी हुआ करता था, जो कई सारे करतब से लोगों का मनोरंजन करते थे।

एक बार उस सर्कस में पांच हाथियों ने सर्कस के करतब किए।

करतब ख़त्म हो जाने के बाद उन्हें कमजोर रस्सी से बांधकर रखा जाता था,

जिससे वे आसानी से बच सकते थे, लेकिन उन्होने कभी भी खुद को छुड़ाने का प्रयास नही किया।

एक दिन सर्कस में जाने वाले एक व्यक्ति ने रिंगमास्टर से पूछा, “इन हाथियों ने रस्सी तोड़ा क्यों नही?”

इस सवाल पर रिंगमास्टर ने उत्तर दिया, “जब वे छोटे थे, तब इन हाथियों को पतली-पतली रस्सी से बंधा जाता था,

लेकिन वे छोटे होने के कारण कोशिश करने पर भी उस रस्सी से छूट नहीं पाते थे।

धीरे-धीरे उनकी कोशिश कम होती गयी और उन्होंने मन में ये मान लिया की वे इन रस्सियों को छुड़ाकर नहीं भाग सकते हैं।

वहीं हाथियों को यह विश्वास दिलाया गया था कि वे रस्सियों को तोड़ने और भागने के लिए पर्याप्त मजबूत नहीं हैं।”

इसलिए जब वे बड़े हो जाते हैं तब उन्हें उसी रस्सी से भी आसानी से बांध दिया जाता है।

उन लोगों की इसी विश्वास की वजह से उन्होंने अब रस्सियों को तोड़ने की कोशिश तक नहीं की।

लेकिन देखा जाए तो वे एक ही पल में इन सभी रस्सियों को आसानी से तोड़ सकते हैं, लेकिन वे ऐसा करते नहीं है।

कहानी की सीख

हमें मर्यादाओं को तोड़कर खुद को आजाद करना चाहिए और कहीं गई और मानी गई बातों पर विश्वास नही करना चाहिए बल्कि हर समय उन्हे परखते रहना चाहिए.