मालिक और नौकर

अकबर बीरबल कहानी - Akbar Birbal Kahani

व्यक्ति अकबर के दरबार में आये, दोनों एक दूसरे की शिकायत कर रहे थे।

दोनों कह रहे थे कि दूसरा उसका नौकर है जिसने कुछ साल पहले उसे लूट लिया था और अब उसका मालिक बनना चाह रहा है।

अकबर ने बीरबल को यह मुकदमा सुलझाने को कहा।

बीरबल ने दोनों को फर्श पर नीचे मुंह कर के लेटने को कहा और बोला, "मैं अब कुछ मंत्र पढूंगा।

अपनी साधना के अंत में मैं जान जाऊंगा कि कौन सच बोल रहा है।

झूठे को फांसी पर चढ़ाया जायेगा।"

बीरबल ने एक सैनिक को वहां खड़ा होने को कहा और आंखें बंद कर ली।

थोड़ी देर बाद उसने आंखें खोली और दोनों के पीछे खड़े होकर बोला, "यही अपराधी है। इसे फांसी दे दो।"

तभी उनमें से एक व्यक्ति खड़ा होकर चिल्लाया, "मुझ पर दया करो।

मेरा जीवन बचा लो।" उसे पकड़कर सजा दी गयी।

शिक्षा : आपके भीतर अपराध के प्रति एहसास ही सबसे बड़ी गवाही है अगर इसे जागृत कर दिया जाए तो इस एहसास को जगाने के डर से अच्छा कुछ नहीं है।